शारदीय नवरात्रि 2026
11 अक्टूबर 2026, रविवार प्रतिपदा / माँ शैलपुत्रीघटस्थापना
(कलश स्थापना) मुहूर्त: सुबह 6:31 बजे से 10:27 बजे तक;
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक।
12 अक्टूबर 2026, सोमवार द्वितीया / माँ ब्रह्मचारिणीमाँ दुर्गा की दूसरी शक्ति की पूजा।
13 अक्टूबर 2026, मंगलवार तृतीया / माँ चंद्रघंटामाँ चंद्रघंटा की आराधना।
14 अक्टूबर 2026, बुधवार चतुर्थी / माँ कूष्मांडामाँ कूष्मांडा का पूजन।
15 अक्टूबर 2026, गुरुवार पञ्चमी / माँ स्कंदमातास्कंदमाता की पूजा और अर्चना।
16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार षष्ठी / माँ कात्यायनीकात्यायनी देवी की पूजा।
17 अक्टूबर 2026, शनिवार सप्तमी / माँ कालरात्रिकालरात्रि स्वरूप की उपासना।
18 अक्टूबर 2026, रविवार अष्टमी / माँ महागौरीमहाष्टमी पूजन (संध्या/विशेष हवन)।
19 अक्टूबर 2026, सोमवार नवमी / माँ सिद्धिदात्री पूजा , इस वर्ष अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन (19 अक्टूबर) को है।
महानवमी और कन्या पूजन।देवी सिद्धदात्री रूप की पूजा की जाती है इस दिन नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान और पूजा पूर्ण हो जाती है।
इस दिन अधिकांश लोग कन्या पूजन करते है।
20 अक्टूबर 2026, मंगलवार दशमी / विजयादशमी (दशहरा) रावण दहन और शस्त पूजा का पर्व।
दशमी तिथि को नवरात्रि दुर्गा विसर्जन का कार्यक्रम किया जाता हैं साथ में दशमी तिथि दशहरा यानी विजया दशमी का कार्यक्रम किया जाता हैं।
नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान
1 – माँ शैलपुत्री पूजा – यह देवी दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप है।
मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं और इनकी पूजा से चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त हो जाते हैं।
2 – माँ ब्रह्मचारिणी पूजा – ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
3 – माँ चंद्रघंटा पूजा – देवी चंद्रघण्टा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
4 – माँ कूष्मांडा पूजा – माँ कूष्माण्डा सूर्य का मार्गदर्शन करती हैं अतः इनकी पूजा से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है।
5 – माँ स्कंदमाता पूजा – देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से बुध ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
6 – माँ कात्यायनी पूजा – देवी कात्यायनी बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से बृहस्पति के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
7 – माँ कालरात्रि पूजा – देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
8 – माँ महागौरी पूजा – देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
9 – माँ सिद्धिदात्री पूजा – देवी सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
मनोकामना सिद्धि हेतु निम्न मंत्र का यथाशक्ति श्रद्धा अनुसार जप करें:-
”ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥“
’ नौ दिनों तक माता का व्रत रखें। अगर शक्ति न हो तो पहले, चौथे और आठवें दिन का उपवास अवश्य करें।
’ पूजा स्थान में दुर्गा, लक्ष्मी और मां सरस्वती के चित्रों की स्थापना करके फूलों से सजाकर पूजन करें।
’ नौ दिनों तक मां दुर्गा के नाम की ज्योति जलाएं।
’ मां के मंत्र का स्मरण जरूर करें- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’
’ इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें।
’ मां दुर्गा को तुलसी दल और दूर्वा चढ़ाना मना है।
’ पूजन में हमेशा लाल रंग के आसन का उपयोग करना उत्तम होता है। आसन लाल रंग का और ऊनी होना चाहिए।
’ पूजा के समय लाल वस्त्र पहनना शुभ होता है। वहीं इस दौरान लाल रंग का तिलक भी लगाएं।
’ कलश की स्थापना शुभ मुहूर्त में करें और कलश का मुंह खुला न रखें।
’ पूजा करने के बाद मां को दोनों समय लौंग और बताशे का भोग लगाएं।
’ मां को सुबह शहद मिला दूध अर्पित करें। पूजन के पास इसे ग्रहण करने से आत्मा व शरीर को बल प्राप्ति होती है।
’ आखिरी दिन घर में रखीं पुस्तकें, वाद्य यंत्रों, कलम आदि की पूजा जरूर करें।
० विजय दशमी के दिन शमी व अपराजिता के पौधे को घर में लगाकर पूजन करे व् अस्त्र शस्त्रो का आज के दिन अवश्य पूजन करना चाहिए।
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पंडित कौशल पाण्डेय

